राशि के अनुसार पहने रूद्राक्षRashi Ke Anusar Rudraksh

शिव महापुराण के अनुसार भगवान शिव के आंसुओ से रूद्राक्ष की उत्पति हुई है। रूद्राक्ष धारण करने से महादेव की कृपा मिलती है और परेशानियां दूर होती है। जो व्यक्ति रूद्राक्ष को धारण करता है उसे नकारात्मक ऊर्जा भी उन पर हावि नही होती है। रूद्राक्ष का प्रयोग राशि अधपति ग्रहो की शांति के लिए भी किया जाता है। साथ ही रूद्राक्ष का प्रयोग ग्रहो की महादषा में भी किया जाता है।
1. मेष राशि का स्वामी मंगल ग्रह है, इसिलिए मेष राशि के जातको को तीन मुखी रूद्राक्ष धारण करना चाहिए।
2. वृषभ राशि का स्वामी शुक्र ग्रह है, इसिलिए वृषभ राशि के जातको को छः मुखी रूद्राक्ष धारण करना चाहिए।
3. मिथुन राशि का स्वामी बुध ग्रह है, इसलिए मिथुन राशि के जातको को चार मुखी रूद्राक्ष धारण करना चाहिए।
4. कर्क राशि का स्वामी चन्द्र ग्रह है, इसलिए कर्क राशि के जातको को दो मुखी रूद्राक्ष धारण करना चाहिए।
5. सिंह राशि का स्वामी सूर्य ग्रह है, इसलिए सिंह राशि के जातको को एक या बारह मुखी रूद्राक्ष धारण करना चाहिए
6. कन्या राशि का स्वामी बुध ग्रह है, इसलिए कन्या राशि के जातको को चार मुखी रूद्राक्ष धारण करना चाहिए ।
7. तुला राशि का स्वामी शुक्र ग्रह है, इसिलिए तुला राशि के जातको को छः या तेरह मुखी रूद्राक्ष धारण करना चाहिए।
8. वृष्चिक राशि का स्वामी मंगल ग्रह है, इसलिए वृष्चिक राशि के जातको को तीन मुखी रूद्राक्ष धारण करना चाहिए।
9. धनु राशि का स्वामी गुरू ग्रह है, इसलिए धनु राशि के जातको को पंचमुखी रूद्राक्ष धारण करना चाहिए।
10. मकर राशि का स्वामी शनि ग्रह है, इसलिए मकर राशि के जातको को सात या चौदह मुखी रूद्राक्ष धारण करना चाहिए।
11. कुम्भ राशि का स्वामी शनि ग्रह है, इसलिए कुम्भ राशि के जातको को सात या चौदह मुखी रूद्राक्ष धारण करना चाहिए
12. मीन राशि का स्वामी गुरू ग्रह है, इसलिए मीन राशि के जातको को पंचमुखी रूद्राक्ष धारण करना चाहिए।
रूद्राक्ष धारण करने की विधि
अगर आप रूद्राक्ष धारण करना चाहते है तो, किसी भी शुभ मुर्हत और ग्रहो के शुभ दिन के आधार पर शुभ चौघडिया देखकर धारण करे । रूद्राक्ष को धारण करने से एक दिन पहले रात्रि में रूद्राक्ष को घी में डुबाकर रख देवे, इसके पश्चात अगले दिन प्रातः किसी शुभ मुर्हत में रूद्राक्ष को शुद्ध जल या गंगाजल से धो देवे, इसके बाद पंचामृत से धोकर पवित्र कर लेवे इसके बाद रूद्राक्ष की विधिवत तरीके से पूजा करे एवं साथ ही भगवान शिव के पंचाक्षर मंत्र ओम नमः शिवाय का 108 बार जाप करे । इसके पश्चात रूद्राक्ष को सोने, चांदी या लाल धागे में पिरोकर पूरी श्रद्धा के साथ धारण करे, आपको अवश्य ही लाभ मिलेगा।
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