काल सर्प दोषKaal Sarp Dosh

कुंडली में काल सर्प दोष

कुंडली में कालसर्प योग के बारें में भी ज्योतिष विस्तृत चर्चा की गयी है। कालसर्प तब होता है जब राहु-केतु के मध्य सातों ग्रह हो। सरल शब्दों में जब जातक की कुंडली में सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि राहु और केतु के बीच आ जाएं तब ‘कालसर्प योग’ निर्मित होता है। कालसर्प योग सदैव दुष्प्रभावी नहीं होता अपितु ऐसा देखा गया है कि कालसर्प योग होने की स्थिति में यदि राहु पंचम, द्वितीय, अष्टम अथवा सप्तम भाव में हो तभी यह आपके लिए अधिक कष्टदायक बनता है। राहु की विभिन्न भावों में स्थिति के अनुसार 12 प्रकार के कालसर्प योग बनते हैं उनमें से केवल 2 ही विशेष दुर्भाग्यदायक होते हैं और वह हैं कालसर्प दोष के विद्यमान होने पर पंचम अथवा द्वितीय भाव में राहु का अकेले होकर बैठना।

काल सर्प दोष के लक्षण इस दोष की वजह से संतान उत्पत्ति में बाधा, निराशा, अवसाद, असफलता आदि का सामना करना पड़ता है।

काल सर्प योग से बचने के उपाय काल सर्प योग से निवारण हेतु सबसे बेहतर उपाय नागों की पूजा और नाग पंचमी के दिन दान और सांप को दूध पिलाना बताया गया है।

साथ ही चन्द्र ग्रहण के दिन बहते जल में चांदी के सर्पों को बहाने से भी काल सर्प दोष से मुक्ति मिलती है।

इसके अलावा भगवान शिव को सांपो का देवता माना जाता है इसलिए जितना हो सके “ओम नमः शिवाय” और महामृत्युंजय मंत्र का सुबह-शाम का जाप करना चाहिए और शिवलिंग की पूजा करनी चाहिए।


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