सूर्य महाग्रह मंत्र - Surya Graha Mantra
नवग्रह मंत्र

सूर्य महाग्रह मंत्र - Surya Graha Mantra

Team Raftaar

सूर्यदेव का स्वरूप: सूर्यदेव की दो भूजाएं हैं। वह कमल के आसन पर विराजमान रहते हैं। उनके दोनों हाथों में कमल सुशोभित रहते हैं। उनकी कांति कमल के भीतरी भाग के जैसी है और वह सात घोड़ों के रथ पर आरूढ़ रहते हैं। सूर्यदेव की प्रतिमा का स्वरूप ऐसा ही होना चाहिए।

विशेष बातें- वेदी के मध्य में श्वेत चावलों पर सूर्य देव की प्रतिमा की स्थापना करनी चाहिए। सूर्य के अधिदेव शिव माने गए हैं। सूर्य को गुड़ और चावल से बनी खीर का नैवेद्य अर्पित करना चाहिए।

सूर्यदेव का मंत्र (Surya Mantra in Hindi): ऊं नमो भगवते श्रीमते पद्मप्रभु तीर्थंकराय कुसुम यक्ष मनोवेगा यक्षी सहिताय ऊं आं क्रों ह्रीं ह्र: ||

आदित्‍य - महाग्रह मम कुटुंबस्‍य सर्व दुष्‍टग्रह, रोग कष्‍ट निवारणं कुरू कुरू सर्व शान्तिं कुरू कुरू |

सर्व समृद्धं कुरू कुरू इष्‍ट संपदां कुरू कुरू अनिष्‍ट निवारणं कुरू कुरू |

धन धान्‍य समृद्धिं कुरू कुरू काम मांगल्‍योत्‍सवं कुरू कुरू हूं फट् || 7000 जाप्‍य ||

मध्‍यम मंत्र- ऊं ह्रीं क्‍लीं सूर्यग्रहारिष्‍टनिवारक श्री पद्मप्रभु-जिनेन्‍द्राय नम: शान्तिं कुरू कुरू स्‍वाहा || जाप्‍य 7000 ||

लघु मंत्र- ऊं ह्रीं णमो सिद्धाणं || 10000 जाप्‍य ||

तान्त्रिक मंत्र- ऊं ह्रां ह्रीं ह्रों स: सूर्याय नम: || 7000 जाप्‍य ||