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अपराध और हस्तरेखाऐं: जैसा कि हम जानते हैं हस्तरेखा विज्ञान एक वृहद शास्त्र है जो हर विषय पर जानकारी उपलब्ध कराता है और जिसकी मदद से हम बहुत सी समस्याओं का समाधान कर सकते हैं। जैसे कि समाज में बढ़ते अपराधों को रोकने में हस्तरेखा शास्त्र काफी मददगार साबित हो सकता है ! जी हां , कोई भी कुशल हस्तरेखा शास्त्री किसी व्यक्ति के हाथ का परिक्षण कर ये मालुम कर सकता है कि अमुक व्यक्ति अपराधी है अथवा सामान्य इंसान ! सामान्यतः हम जब भी किसी हाथ का अध्ययन करते हैं तो सर्वप्रथम अंगुलियों व अंगूठे की बनावट पर ध्यान देते हैं। अगर दोनों हथेलियों की त्वचा खुरदरी , अंगुलिया आगे से नुकीली व अंगूठा चपटा हो तथा मस्तिष्क रेखा हथेली के बीचों बीच नीचे की तरफ झुकती चली जाये अथवा ऊपर की तरफ उठती हुई ह्रदय रेखा से मिलने की कोशिश करे या मिल जाय तो समझ जाइये, ये हाथ किसी मानसिक रूप से विक्षिप्त अपराधी का है जो समय के साथ उग्र होता जाएगा । साथ ही ऐसे व्यक्ति के हाथ में शनि , मंगल पर्वत की स्थिति का भी सही आकलन जरूरी है। कोई भी कुशल हस्तरेखा विशेषज्ञ ये आकलन कर सकता है कि अमुक व्यक्ति किस समय अपराध करेगा ! जैसे कि मस्तिष्क रेखा या उससे निकल कर कोई शाखा अगर सूर्य पर्वत के नीचे आकर ह्रदय रेखा से मिल जाये अपराधी अपनी योजना को 25 वर्ष की उम्र तक मूर्त रूप दे देगा और अगर मस्तिष्क रेखा ,सूर्य व शनि पर्वत के मध्य आकर ह्रदय रेखा से मिले तो आप अंदाजा लगा लीजिये कि अपराध 30 वर्ष की आयु तक हो चुका होगा , इसी तरह हम आगे की गणना भी कर सकते हैं ।इसके अलावा मंगल , शनि व चन्द्र पर्वत पर स्थित क्रॉस ,जाल व काले धब्बे भी आपराधिक् स्वभाव के द्योतक होते हैं ।अपराध किस प्रकार का होगा, ये भी हम जान सकते हैं! जैसे कि हत्या , बलात्कार ,चोरी , डाका ,आत्महत्या आदि।चूंकि अपराध का सीधा सम्बंध व्यक्तिकी मनोवृत्ति जुड़ा है और मन का कारक चन्द्रमा है अतः जब भी किसी के हाथ का अध्ययन किया जायतबचन्द्रमा के पर्वत और मस्तिष्क रेखा का अच्छी तरह से अध्ययन बहुत जरूरी है । नीचे की तरफ अत्यधिक झुकी हुई मस्तिष्क रेखा अवसाद व आत्महत्या की प्रवृति को बढ़ावा देती है। कई बार मैंने ये भी देखा है कि अपराध होने से पूर्व अपराधी के हाथ में मंगल शनि व चन्द्रमा के क्षेत्र पे कुछ विशेष काले, भूरे दाग धब्बे व आकृतियां उभरने लगती हैं जिनका बारीकी से अध्ययन बहुत जरुरी है ।
दुर्घटना या हानि और हस्तरेखाऐं: हथेली की उन रेखाओं व पर्वतों की जिन पर निशान पाया जाता है , जैसे कि जब क्रॉस का चिन्ह जीवन रेखा और भाग्य रेखाके मध्य पाया जाता है तब वह जातक के बिजनेस में या व्यापार में नुकसान का सूचक होता है इसी प्रकार जब क्रॉस का चिन्ह मस्तिष्क रेखा पर पाया जाता है तो उस समय विशेष में सिर पर चोट लगने या किसी सर्जरी का सूचक या सिर पर आघात लगने का सूचक होता है और जब क्रॉस का चिन्हजीवन रेखा पर पाया जाता है तो उस समय काल में व्यक्ति को दुर्घटना या किसी भी तरह की आर्थिक मानसिक व शारीरिक हानि उठानी पड़ती है।और जब✖ हृदय रेखा पर पाया जाए तो हृदयाघात या किसी सर्जरी या किसी भी तरह के मानसिक आघात का दिल पर गहरा प्रभाव पड़ता है । जब चंद्रमा के क्षेत्र पर अगर क्रॉस के एक या कई निशान पाए जाए तो यह यात्रा में असफलता या किसी दुर्घटना का सूचक होता है। इसी प्रकार बुध के क्षेत्र के पर्वत पर अगर क्रॉस का निशान पाया जाए तो उस समय अवधि में व्यक्ति को कारोबार मे विशेषकर साझेदारी में नुकसान पहुंचाता है। सूर्य पर्वत पर पाए जाने वाला क्रॉस का चिन्ह व्यक्ति को उसके कार्य क्षेत्र में अपयश या बदनामी दिलाता है। इसी प्रकार शनि पर्वत पर पाया जाने वाला क्रॉस का चिन्ह व्यक्ति को किसी दुर्घटना या जीवन पर खतरे का सूचक होता है। शुक्र के क्षेत्र पर पाए जाने वाले एक या दो क्रोस ✖ ये दर्शाते हैं कि जातक को अपने जीवन काल मे प्रेम संबंधों मे असफलता मिलगी । इसी प्रकार मंगल (उच्च व नीच)के क्षेत्र पर पाये जाने वाले गुणन ✖ भी अशुभ फल देते हैं जैसे कि शस्त्राघात से मृत्यु या अपराधिक तत्वों द्वारा मृत्यु ।यानि कि गुणन या ✖ अधिकतर परेशानी व मानसिक अवसाद का कारण होता है। अतः किसी भी हस्तरेखा विशेषज्ञ को हाथ मे क्रोस अध्ययन काफी सावधानी से करना चाहिए और तभी भविष्यवाणी करनी चाहिए।
भविष्य और हस्तरेखाऐं: गुरु पर्वत पर क्रॉस वैसे तो क्रोस या गुणन का चिन्ह हाथ में कहीं भी हो तो उसका अशुभ ही परिणाम देखने में आता है, परंतु गुरु पर्वत पर क्रॉस की उपस्थिति बहुत ही शुभ होती है। अगर हथेली में गुरु पर्वत पर क्रॉस पाया जाता है तो इसका सीधा संबंध संपन्न और सुखद जीवन से होता है, मैंने 90% केसेस में देखा है कि जातक के हाथ में जब गुरु पर्वत पर क्रॉस पाया जाता है तो अधिकांशतः उसकी वैवाहिक स्थिति यानी कि ससुराल पक्ष संपन्न होता है। कोई भी कुशल हस्तरेखा विशेषज्ञ क्रॉस का अध्ययन करते वक्त यह ध्यान रखें कि यह चिन्ह हथेली में किस रेखा पर व किस पर्वत पर स्थित है तभी उस की विवेचना करें और कोई फलादेश करे । गुरु पर्वत पर क्रॉस एक चीज और बताता है की जातक का अपने जीवन में कोई ना कोई एक घनिष्ठ प्रेम संबंध अवश्य ही रहेगा। अगर क्रॉस का चिन्ह गुरु पर्वत पर ऊपर की तरफ यानि कि तर्जनी के पास हो तो कोई प्रेम प्रसंग व्यक्ति के जीवन के प्रारंभिक दिनों में शुरु होगा लेकिन वह ज्यादा फलीभूत नहीं हो पाएगा अगर यह निशान गुरु पर्वत पर मध्य में स्थित हो तो जीवन के मध्य काल मे कोई प्रेम अवस्था में कोई प्रेम-प्रसंग जुड़ेगा और काफी समय तक चलने के आसार रहते हैं । क्रॉस का चिन्ह अगर गुरु पर्वत पर काफी नीचे यानी कि हृदय रेखा के समीप हो जीवन कि उत्तरार्ध में कोई प्रेम प्रसंग जुड़ेगा जो कि समय के साथ साथ घनिष्ठ होता जाएगा अतः गुरु पर क्रॉस या गुणन की उपस्थिति अधिकतर शुभफलदायी होती है। कई बार क्रोस का निशान दिल की रेखा व दीमाग की (heart line and brain line) रेखा के बीच मे पाया जाता है, जो यह दर्शाता है कि जातक ईश्रर मे यकीन रखने वाला व कुछ हद तक रुढिवादि प्रकृति का होगा साथ ही ऐसे लोग प्रखर बुद्धि के मालिक होते हैं ।अतः किसी भी कुशल हस्त रेखा शास्त्री को क्रोस का अध्ययन गम्भीरता से करना चाहिए।
हथेली में त्रिकोण का होना और इसका महत्व: त्रिकोण या त्रिभुज , ज्यामिति शास्त्र की ऐसी रचना है जिसका महत्व सिर्फ गणित में ही नहीं अपितु अध्यात्म व ज्योतिष के क्षेत्र में भी उतना ही प्रचलित है। अधिकांश ज्योतिषीय यंत्रों की रचना त्रिभुज के आधार पर ही की जाती है क्योंकि त्रिभुज या त्रिकोण अपने आप में पूर्ण है और समस्त शक्तियां इसमें निहित हैं। हस्त रेखा शास्त्र में भी त्रिभुज को बहुत महत्व दिया जाता है,जो अपने में रहस्य व रोमांच समेटे हुए है हथेली में त्रिभुज सफलता की निशानी माना जाता है । स्वयं मेरा अनुभव रहा है कि जब भी हथेली के बीच में त्रिभुज या कोई भी त्रिकोड़ात्मक आकृति दिखाई दे तो ये आर्थिक सम्पन्नता व जायदाद ( property) का सूचक है। साथ ही व्यक्ति को संकट से भी बचाता है। हथेली में ये चिन्ह जहां भी पाया जाता है , वहां की शक्ति बढ़ जाती है। जैसे कि... "सूर्य "पर्वत पर स्थित त्रिभुज कला के क्षेत्र में जातक को धीरे धीरे उच्च सफलता दिलाता है।ऐसे जातक गंभीर स्वभाव के होते हैं । " चन्द्रमा" के क्षेत्र पर स्थित त्रिभुज ये दर्शाता है कि व्यक्ति की विचार शक्ति काफी प्रबल है और वो जो कुछ भी सोचता है उसका कोई न कोई आधार जरूर होता है। त्रिकोण अगर "मंगल" के क्षेत्र पर पाया जाये तो जातक के जीवन में संघर्ष की स्थिति कम ही आती है और किसी कारणवश मुश्किल आ भी जाए तो ऐसे लोग अपनी चतुराई व बहादुरी से परस्थिति का सामना करते हैं । त्रिभुज की "शनि"पर स्थिति बड़ी रोचकता लिये हुए होती है क्योंकि ऐसे जातक अवश्य किसी न किसी रहस्यात्मक व गूढ़ विद्या के जानकार होते हैं। अर्थात बड़े बड़े ज्योतिषाचार्यों, तांत्रिकों आदि के हाथ में शनि के क्षेत्र पर त्रिभुजाकार आकृति अवश्य ही पायी जाती है। ऐसे लोग अपनी चमत्कारी विधाओं किसी का भी ध्यान अपनी और खींच लेते हैं । आइये अब बात करते हैं "गुरु" (Jupiter) क्षेत्र पर स्थित त्रिभुज की... "गुरु" पर्वत पर स्थित त्रिभुज व्यक्ति की बौद्धिक व प्रबंधन क्षमता को दर्शाता है। ऐसे लोग किसी भी संस्था की प्रबन्ध व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने में निपुण होते हैं।अर्थात manager आदि के पद पर आसीन लोगों के हाथ में Jupiter पर त्रिभुज का चिन्ह अवश्य पाया जाता है। अब बात करते हैं "बुध " पर्वत पर स्थित त्रिभुज की.. "बुध "पर्वत पर ये त्रिभुज, आर्थिक सम्पन्नता दर्शाता है, मतलब ऐसे जातक, अपनी सूझ बूझ से व्यापार को बढ़ाते हैं । और अब आते हैं " शुक्र" पर्वत पर त्रिभुज की ओर, जिसका सीधा सा अर्थ है प्रेम, प्यार, भोग विलास, आमोद, प्रमोद व जीवन में भरपूर प्यार। त्रिभुज की आकृति अगर पति व पत्नी दोनों के ही हाथ में हो तो वैवाहिक जीवन सुखद होता है। "शुक्र" पर त्रिभुज प्रेम व प्रेमी दोनों के लिए ही अच्छा होता है यानी कि इस क्षेत्र पर त्रिभुज प्रेम में सफलता दिखता है। मेरे कहने का अभिप्राय ये है कि त्रिकोण हाथ में जहां भी होगा वहां की शुभता को बढ़ा देता है और व्यक्ति को संकट से बचाता है। की उपस्तिथि हाथ में हमेशा सफलता की सूचक है और अगर आपकी हथेली में बीचों बीच कोई त्रिकोण का चिन्ह जो कि कई रेखाओं से मिलकर बन रहा हो तो ये जमीन जायदाद का सूचक होता है यानी कि ऐसे जातक अपने जीवन काल में भवन निर्माण अवश्य करवाते हैं। अगर आप भी उन भाग्यशाली जातकों में शामिल हैं जिनके हाथ में त्रिभुज का चिन्ह है तो यकीनन आप एक् सफल व सुखी व्यक्ति हैं और आप पर ईश्वर की कृपा है।
विद्यार्थियों के लिए विद्या प्राप्ति टोटके, मन्त्र और दान: 1. प्रातः स्नानादि से निवृत होकर पूजा स्थान में जाएं और एक माला गायत्री मंत्र का जाप करें। 2. सफलता प्राप्ति करने हेतु किसी पुष्य नक्षत्र के दिन दो पंचमुखी रुद्राक्ष लाएं और साथ ही एक छः मुखी रुद्राक्ष लाएं और उसे इस प्रकार लाल धागे में धारण करें कि छः मुखी रुद्राक्ष बीच में रहे। 3. प्रातः काल स्नानादि करके पूजा स्थल में जाकर रामचरित मानस की इस पंक्ति को 108 बार जपें " गुरु गृह गये पठन रघुराई, अल्पकाल विद्या सब आई" 4. काली मिर्च, सोंठ, इलायची और चीनी मिलाकर पीसकर चूर्ण बनाएं और इसे घी में मिलाकर गोलियां बनाएं और प्रतिदिन दो गोली रात्रि को सोते समय दूध के साथ लें। स्मरण शक्ति के साथ एकाग्रता भी बढ़ेगी । 5. बृहस्पतिवार के दिन एक तस्वीर माता सरस्वती की भी घर लाएं और उसे अपने अध्ययन कक्ष की उतरी दीवार या पूर्वी दीवार पर लगाएं और रोज उसके समक्ष खडे होकर धूप करें व निम्न मंत्र का जाप करें - ऊँ मां सरस्वती विद्या देवी नमो नमः । 6. प्रतिदिन जब आप अध्यन के लिए बैठते हैं तो उससे पूर्व अपनी कलम को माथे से लगाएं और पुस्तकों के समक्ष हाथ जोड़कर बोले - ऊँ गुरवै नमः मंत्र पढ़ें फिर अध्ययन शुरु करें । 7. बृहस्पतिवार के दिन किसी गरीब बच्चे को पुस्तक, कापी, पैंसिल आदि दान करें। 8. रात्रि के समय भोजन के पश्चात् एक पान में इलायची, सौंफ, एक लौंग और चीनी मिलाकर रोटी के साथ बैल को दें। 9. गुरुपुष्य नक्षत्र के दिन तांबे पर उकेरित बृहस्पति यंत्र घर में लाएं। उसे पीले कपड़े पर पूर्णतः गंगाजल से शुद्ध करके पूजा घर में रखें और बृहस्पति कवच का रोज पाठ करें । 10. रोज रविवार को छोड़कर पीपल के वृक्ष में ऊँ बृहस्पतयै नमः का नाम जाप करते हुए जल चढ़ाएं और 3 परिक्रमा करें ।

हस्तरेखा विशेषज्ञ, अलका बिड़ला